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कुदरत की फटकार

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कुदरत से पूछा आपने खराब आदमीयों को क्यों बनाया ? दिन रात काले कारनामे करते है ।

कुदरत ने कहा ” मुझ से हिसाब मत पूछ, हजार बार तूझे कह चुका हुं मैने तो मानव को प्राणी बना के छोड दिया है । तूम मानव प्राणीयों को अच्छे इन्सान बनने का शौक जगा था । और इस लिए ही राज्य और धर्म की स्थापना की थी । तूम मानव प्राणीओ ने अपने आप को कन्ट्रोल कर लिया, धर्म के नियम से, राज्य के कानून से । प्राणी से इन्सान बने, जंगली कातिल से शरीफ और दयावान बने । चोर से शाहुकार बने, जो हाथ अपने मुह की और मुडता था वो हाथ दूसरे के मुह तक जाने लगा, खाना खिलाने के लिए । मुझे अच्छा लगा था, कम से कम मेरा बनाया एक प्राणी थोडा अलग से जीवन जी रहा है ।”

मैने कहा “हमारी कहां भूल हुई, जो अब सब बदल रहा है, इन्सान वापस प्राणी बन रहा है ।”

कुदरत ने कहा ” अब शायद तूम कानून और धर्म से उब चूके हो । कानून और धर्म से इन्कार कर रहे हो । कोइ फिल्टर नही रहा तुम्हारे पास । कौन सी चीज मन को साफ करेगी ? कैसे कंट्रोल करोगे अपने आप को ? बिना लगाम तो अंदर का जानवर उठेगा ही । “

मैने कहा ” आप मानव मनमें जानवर ही क्यों डालते हो ? शरीफ इन्सान की तरह क्यों नही पैदा करते ? ”
कुदरतने डांटते हुए कहा ” मुझे तूमसे सिखना पडेगा मुझे क्या करना है ? इतना बडा ब्रह्मांड मेरे सामने है । हजारों आकाश गंगाएं, अरबों सुर्य, खरबों ग्रह उपग्रह चलते हैं मेरे ही बनाये नियम से । कहीं से कोइ फरियाद नही । तुम्हारी पृथ्वि तो कण भी नही मेरे लिए, और उस पर बसे तूम । मेरे नियम बदलवाना चाहते हो ? ”

मेरे सब नियम सेट है । बदलाव नही हो सकता । तूम भी अपने जीने के नियम सेट कर लो, धर्म और राज्य के कानून से । उसे कमजोर मत होने दो ।

मेरे इस सवाल पर मुझे कुदरत की वो डांट पडी की आगे कोइ सवाल नही सोच पाया ।

कुदरत की इस फटकार से दो बात सिखने को मिली । एक, हमारी सारी शिक्षा, सारे संस्कार, हमारे धर्मों को भूल कर वापस कुदरत के शरण में चले जाओ और वापस जंगली प्राणी जैसे मानव प्राणी बन जाओ । जीओ या मरो किसी को कोइ फरक नही पडेगा । और दो, हमारे धर्मों को बराबर से पकड लो, इस का विकास करो, इस का अनुसरण करो ।

आधुनिक शिक्षाने नास्तिकों की फौज तैयार कर ली है । ईश्वर को ही नकार दिया है । विधर्मियों की फौज तो पहले से ही तैयार बैठी है चोट पहुंचाने के लीए । माना की ईश्वर कहीं नही । तो ? क्या करना है ? नास्तिक को पता नही है उस के अंदर के संस्कार उस के मापबाप के दिये हुए संस्कार है । इस लिए शरीफ बना घुम रहा है । उस के बच्चे, फिर उस के बच्चे तो जंगली हो जाएंगे ।

आदमी कपडा इस लिए नही पहनता की किसी की बूरी नजरों से बचना है, बल्की इसलिए पहनता है की खूद की नंगाई जाहिर ना हो जाये । कमसे कम इश्वर को कपडा ही समज लो, अपनी आत्मा को पहनने दो, आपकी अंदर अगर बूरी आत्मा निवास करती है तो बाहर नही आ पायेगी ।

विधर्मियों को पता होना चाहिए की इश्वर-रूपी ये कपडा कोइ वाहन नही है जो स्वर्ग या जन्नतमें ले जाये । ये आत्मा का कपडा है, आत्मा के कंट्रोल के लिए है । दुनिया की जनता के एक बडे हिस्सेने अपने अपने मनपसंद कपडा पहन लिया है । उसे निकाल कर अपना कपडा पहनाने की कोशीश बेकार है ।



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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

akraktale के द्वारा
04/01/2013

कुदरत से खिलावाड न करने का संदेश देते सुन्दर आलेख के लिए बधाई स्वीकारें आद. भरोडिया जी.

    bharodiya के द्वारा
    05/01/2013

    अशोकभाई नमस्कार धन्यवाद आप का प्रतिक्रिया के लिए ।

RaJ के द्वारा
01/01/2013

हर सख्स अपने स्वार्थ में ही खो गया है अपने को बचाना है, अमर होने का वहम हो गया है | विकृत समाज से समाज का न होना ही श्रेयकर है

    bharodiya के द्वारा
    03/01/2013

    नमस्ते राजभाई बिलकुल सही । विकृत चीज से चीज ही ना मिले अच्छा है ।

RaJ के द्वारा
01/01/2013

भदोरिया जी आपका लेख श्रेष्ठ है

01/01/2013

बहुत हद तक सही है भाई साहब

    bharodiya के द्वारा
    03/01/2013

    नमस्कार सुधीरभाई आभार आपका और आप का स्वागत भी ।

drbhupendra के द्वारा
01/01/2013

कंट्रोल का ब्रेक पश्चिम की आंधी ने फेल कर दिया … भरोदिया जी

    bharodiya के द्वारा
    03/01/2013

    नमस्कार डो साहब ये आंधी शायद और बढनेवाली है । समाचार पत्र ही दिव्यभास्करसे पोर्नभास्कर बन जाये तो यही होना है ।

ashishgonda के द्वारा
01/01/2013

आदरणीय बड़े भाई साहब! सादर अभिवादन. वर्तमान समस्या पर बिलकुल सोंच पैदा करता आलेख. इसके बारे में थोडा बहुत फेसबुक पर भी पढ़ा….बहुत ही अच्छी सोंच है जिसके लिए निश्चय ही धन्यवाद के पात्र हैं. मैं इस आलेख पर अपने कोई विचार नहीं रखना चाहता क्षमा करें,इन दिनों कुछ सीखने में लगा हूँ..वाद-विवाद के लिए बहुत सारे ज्ञानी हैं……..

    bharodiya के द्वारा
    03/01/2013

    नमस्ते अशीश धन्यवाद प्रतिक्रिया के लिए


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