भारत बाप है, मा नही

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ॐ को बचाना है

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एक धार्मिक प्रवासी स्टेफन क्नॅप के लेख पर आधारि——–जो २००१ मे लिखा गया था ।

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सालों से हम देखते आ रहे हैं की भारतमें हिन्दुत्व को इसाइयत या इस्लाम में बदला जा रहा है । लेकिन मेरी भारत की मुलाकात के बाद साफ हो गया ही हकिकतमें क्या हो रहा है । इतना ही नही, भारतिय लोगों को भी मालुम ही नही, जागरूत ही नही क्या हो रहा है । कइ लेवल पर ये हो रहा है, कुछ स्थान पर तो बहुत तेजी से हिन्दुत्व नाश हो रहा है ।

जब २००१ में मै घुम रहा था, वैदिक कल्चर के महत्व के कुछ भाषण मुम्बई, नागपूर, वरान्गल,विशाखापट्टनम, विजयवाडा,हैदराबाद,बेन्गलोर,त्रीवेन्द्रम और चेन्नईमें सुने । मेरी काफी आध्यात्मिक लीडर और बुध्धिजीवियों से मुलाकात हुई, और जाना की धर्मांतरण कितनी गंभीर समस्या है ।

मैं इसाई हुं तो इसाइयत जानता हुं, मुझे खूद इसाइयत पर फरियाद नही है, मेरा विरोध इस बात का है गोड और इन्सानियत का सही मेसेज देने के बदले कुत्ते की तरह भॉका जा रहा है  इसाइतय ही सही है बाकी धर्म ठीक नही । इसाइयत के अंदर भी केथोलिक और प्रोटेस्टंटमें और दूसरी ब्रांच मे भी भेद है । ऐसा लगता है हमारी श्रध्धाएं सहकार के लिए नही परंतु भेदभाव के लिए है, हर एक को इसाइयत के प्रभाव में नर्कागारमें ही ढकेलना है ।

भारत की बात करें तो बहुत सारी मिशनरीज स्पर्धा कर रही है, किसे ज्यादा से ज्यादा धर्मांतरण करना है । दक्षिण के बापटिस्ट ने लगभग १००००० प्रोफेशनल मीशनरीज उत्तर भारत में छोड रख्खे हैं । वो सब गोड का संदेश फैला रहे हैं । ये भी देखने में आया है की कई इसाई फाधर सन्यासी के कपडे पहनते हैं और अपने स्थान को आश्रम कहते हैं । इसाइयत को वैदिक आभास दिलाया जाता है । भारत नाट्यम डान्स इसाइ स्कूलमें सिखाया जाता है लेकिन इसाई सिम्बोल और अर्थों के साथ, वैदिक अर्थ को हटा कर । ये सब प्रयत्न है हिन्दुत्व को मिटा कर इसाइयत को उभारना ।

एक तरह से इसाइयत को भारतिय कल्चरमें गहराई तक घुसाने के लिए हिन्दुओं के रिवाज, धार्मिक विधी, कपडे की कोपी की जा रही है । कमल पर क्रोस, कुछ चर्च हिन्दु मंदिर के आकार के, ऐसे चलता रहा तो एक दिन ऐसा लगेगा की इसाई, हिन्दु से भी ज्यादा हिन्दु है ।

नोर्थ इस्ट के राज्यों में देखा आदीवासी को एक पोलीएस्टर पेंट की लालच दे कर इसाई बना देते हैं । अगर कोइ अपने पूरे फेमिली को या मित्रों को इसाई बनाता है तो उसे मोटर बाईक का लालच देते हैं । मध्य प्रदेश जैसे राज्य में ऐसे आदीवासी को लोन दिया जाता है जो वापस लौटा नही सकता  । अगर वो इसाई बनता है तो लोन और ब्याज माफ किया जाता है । स्वतंत्र भारतमें ये हो रहा है । हिन्दुओं की सहनशिलता का परिणाम है । मुस्लिम देश में ऐसा हुआ तो मिशनरी को देश से निकाल दिया जाता या जिन्दा नही छोडा जाता ।

उन लोगों की एक तरकिब देखीए । बिमार आदीवासी को बिन असरकारक दवा दी जाती है फिर कहा जाता है अपने देव को प्रर्थना करो तूझे ठीक कर दे । जाहिर है दवाका असर नही होना है । फिर मिशनरी असली दवा देते हैं और कहते हैं दवा लेने से पहले जीसस का नाम लो अच्छे हो जाओगे । दवा सही होती है मरीज अच्छा हो जाता है साथमें जीसस मनमें बैठ जाता है । समाज सेवाके नाम पर आदीवासी एरियामें धर्मपरिवर्तन इस तरह हो रहा है ।

वो समुहमें एक प्रोग्राम रखते हैं । जुठे दरदी को पैसे देखर बुलाया जाता है । वो मिटिंगमें बोलते हैं मुझे ये या वो बिमारी थी जीसस के कारण या चर्च जाने के कारण बिमारी चली गई ।

भोले आदीवासियों के मनमें बैठा दिया जाता है की चर्च जाने से बिमारियां चली जाती है । उच्च जाति के लोगों में ये तरिका काम में नही आता है इस लिए आदीवासीयो को टार्गेट किया जा रहा है । आदीवासी एरियामें धर्मांतरण ज्यादा होता है कारण यही है ।

दलितों को कहा जाता है इसाई बनोगे तो आप का जातिका लेबल हट जायेगा । आप से कोइ भेदभाव नही रख्खेगा । लेकिन जब वो इसाई बनता है तो पता चलता है इसाईमें भी जाति का भेदभाव है । उन के लिये दरवाजे अलग होते हैं, सीट अलग होती है, शादी ब्याह भी समान जातिमें होती है और मरने के बाद भी अलग जगह दफनाया जाता है । जब नए बने हुए इसाई को पता चलता है तो विश्व हिन्दु परिषद जैसी संस्था का सहारा लेकर वापस हिन्दु बन जाता है ।

मजे की बात ये है की इसाईयों की इस हरकत के बाद जब कोइ धर्मवापसी करता है तो इसाई चर्च हिन्दु संस्था पर धर्मिक वायोलन्स का आरोप लगाते हैं । उन के अनुसार वो लोग जो धर्म परिवर्तन कर रहे हैं ऐसा करने का अधिकार और किसी को नही है । वी.के.नुह, सक्रेटरी ओफ ध नागालेन्ड क्न्वेन्शन कहता है “ अगर कोइ अपना धर्म फैलाना चाहता है तो इस क्षेत्र का नागरिक नही मानेगा । लडाई ही होगी, हमारे पास और कोइ चारा नही । नोर्थ ईस्टमें अगर हिन्दुइजम फैलाने की कोशश की तो वोर ही होगी ।“

एम.डी.औग्मा, हेड ओफ गारो बाप्टिस्ट कन्वेन्शन ओफ मेघालय कहता है “ अगर वी.एच.पी का सामुहिक धर्मांतरण की बाबत हम चूप रहेंगे तो इसाइयत को खतरा होगा । हमे लडना होगा, हमे विरोध करना होगा । (Maharashtra Herald, July 11, 1998)

ठीक है, हिन्दु मानते हैं कोइ भी आध्यात्मिक रास्ता भगवान की और ले जाता है, और इस लिए हिन्दु सहिष्णु है । लेकिन और धर्म ऐसा नही मानता । हिन्दु एक कल्चर है और उसे तोडना है, नष्ट करना है । नोर्थ ईस्ट को ही ले लो, आसाम, नागालेन्ड, मणीपूरमें विदेशी मिशनरीज के कारण पिछले २५ सालमें  इसाई की आबादी २००% बढ गई है । उन की पकड इतनी मजबूत है की कुछ एरियामें हिन्दु धर्म पर पाबन्दी लग गई है । लोकशाही किधर गई ? हिन्दु खूलेमें आरती या प्रार्थना नही कर सकता । दुर्गापूजा नही हो सकती, दिन दहाडे मुर्ति को तोड दिया जाता है । चर्च स्पोन्सर्ड अलगाववादी, आतंकवादी नफरत फैलाते हैं । ये राज्य भारत से अलग हो ही गये हैं और ऐसे ही चलता रहा तो और राज्य भी अलग हो जायेंगे ।

केथोलिक चर्च का मेसेज है गोड याने प्रेम, गोड के प्रेम से इन्सानियत टिकी हुई है । लेकिन लगता तो नही ऐसा है । दूसरे धर्मों के लिए तो बिलकुल प्रेम नही है ।

जब मैं दिल्लीमें था तब नेशनल कमीटी फोर वुमन की शान्ति रेड्डी से मिला । उसने बताया मिशनरीज छोटे बच्चों का किडनेप करते हैं । चेन्नईमें एक मिशनरी कपल पकडा गया वो आदीवासी से २००० हजार से ५००० हजारमें लडकी खरीदते थे और फोरेनर को ३०००० से ४०००० डोलर में बेचते थे । पकडे जाने से पहले ऐसे २५ ट्रन्जेक्शन उन लोगोंने कर दिये थे ।

देखा जाये तो भारत धीरे धीरे वैदिक कल्चर खोता जा रहा है । कारण है सेक्युलर या अंग्रेजी और इसाई एज्युकेशन । सरकारी स्कूल से वैदिक बूक गायब कर दी गई है । इस लिए कोइ रास्ता नही रहा की पूराना भारतिय साहित्य या कला का अभ्यास हो सके । अब जो बच्चे पढ रहे हैं उसमें वैदिक मूल्य बिलकुल नही है । दूसरी और, मिशनरी स्कूलमें इसाईयत की पढाई होती है । बाइबल भी पढाया जाता है और इस्लामिक स्कूल में कूरान भी पढाया जाता है । और सेक्युलर सरकार अनुदान, जमीन और सुविधा भी देती है ।

आज, भारतिय शहरों में बच्चों के माबाप खूद अंग्रेजी स्कूलों में पढे हैं और वो अपने बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में ही भरती करते हैं । ऐसा रवैया चलता रहा तो सुशिक्षित समुदाय से हिन्दुत्व गायब हो जायेगा । भारतिय बच्चे सेक्युलर सरकार से इसाइयत के मूल्य ही सिख रहे हैं, अपना इतिहास, अपनी संस्कृति के लिए हिन भावना अपना लेते हैं । ये भी सिखाया जाता है की भगवत-गीता, रामायण, पूराण और दूसरे वैदिक ग्रंथ सिर्फ मायथोलोजी है, इस से साबित नही होता की दुनिया की कोइ महान संस्कृति से इस के कोइ संबंध है । ये भी बताया जाता है की आप का इश्वर रक्षस है असली इश्वर के पास जानेका रास्ता सिर्फ जीसस ही है ।

इस का एक द्रष्टांत बताता हुं, दिल्ली के हरे कृष्ण मंदिर के भक्त मिशनरी स्कूल के क्लासीस में चले गये । बच्चों ने सवाल किए “ हमारे भगवान कौन है ?” और “ भगवान हमारे लिए क्या करता है ?” इत्यादि । स्पष्ट बात है, ये सवाल सिधा परिणाम है अंग्रेजी शिक्षा का । क्या ये धर्मान्तरण नही है ? ऐसी शिक्षा बच्चों को अपनी संस्कृति से शक करना सिखाती है, और अपने इतिहास और धर्म का मान करना भूला देती है । इस शिक्षा के कारण हिन्दु जनता धीरे धीरे अपनी मातृभूमि की अमूल्य संस्कृति और इतिहास भूल रहे है ।

भारतमें कई स्कूल के नाम “सेंट झेवियर्स स्कूल” है । लोगों को जानना होगा वो फ्रन्सिस झेवियर (Francis Xavier) कौन था, जो आज वो एक महान संत बन बैठा है । उस संतने ताव मे आ कर कहा था “ जब मैं लोगों को इसाई बनाता हुं, मैं उनसे कहता हुं उस झोपडी को तोड दो जीसमें आप के देवता की मूर्तियां है, ये भी कहता हुं उन मुर्तिओं के टुकडे टुकडे कर दो क्यों की अब वो लोग इसाई है । मेरी आत्मा को बडी राहत मिलती है जब देखता हुं जब मुर्ति पूजक खूद मूर्तियां तोडता है ।“ उस का मकसद यही था की भारतिय संस्कृति को मिटाकर इसाई देश की रचना करना । उस के कातिल इरादों को जानते हुए भी भारत की स्कूलें उस आदमी को मान देती है, विडंबना ही है ।

ये भी देखा गया, बीते ५४ साल से राज्य कर्ता जो भारत का भाग्य बनाते हैं उन्हों ने हमेशा हिन्दु विरोधी आचरण किया है । उन्होंने जो आर्थिक और शैक्षणिक पोलिसियां बनाई है वो देश को जबरदस्ती निभानी पड रही है । वोट पाने के लिए के लिए धार्मिक मायनोरिटी की तरफदारी की जा रही है । सेक्युलर कोंग्रेस हर हालत में हिन्दुओं का तिरस्कार करती है कारण यही है ।

भारत में वैदिक संस्कृति के नूकसान का दूसरा पहलु है भारत के युवा लोग, खास तो १५ से २५ के, जो पच्चीम की खुली समाजिक प्रणाली के प्रभावमें आकर अपने वैदिक रिवाज छोडने को तत्पर है । वो पच्चीम की फिल्में देखते हैं, सेलीब्रीटी मिडियामें क्या कहता है वो पढते हैं सुनते-देखते हैं, उसे पसंद करते हैं और उस के ड्रेस और लाईफ स्टाइल अपना लेते हैं । इस तरह आप देखोगे तो मुंबई जैसे बडे शहरों में लोग बिना शादी किए साथमें रहने लगे हैं, कुछ साल पहले ईस बात की कल्पना भी नही की जाती थी । अब वैदिक नियम अडचनरूप हो गये हो ऐसा लगता है । हिन्दु बेकग्राउंड और विरासत की शरम आती है, भारतिय रिवाज और वैदिक मूल्यों का मान नही कर के विदेशी जिवन शैली अपनाते हैं । इतना ही नही, संस्कृत के विद्वानोमें भी कमी आई है, अध्यतन भारत के लिए रामायण और महाभारत महज एक कथा या टीवी शो बन गये हैं ।

भारतने कई विदेशी आक्रमण सहे है और हर बार भारत उठ खडा है, लेकिन संपत्ति और भूगोल के हिसाब से । असली नूकसान खूद संस्कृति का है । युवा जनरेशन अपनी वैदिक विरासत छोड दे और बुढे होने पर आध्यात्मिक खोज में अपनी विरासत वापस पाना चाहे तो पूरी तरह वो नही मिल सकती । जो नूकसान हो गया वो हो गया ।

कहा जाता है भारतमें ८५% हिन्दु आबादी है । काफी महत्वपूर्ण बात है, लेकिन १५% बुध्धिष्ट, शीख और जैन भी इसमें समाहित है । तो हकिकत में ७०% ही हिन्दु की मेजोरिटी बनती है । सेक्युलरिजम की वजह से हिन्दु आबादी का परसन्टेज ड्रोप कितनी पिढियों तक गीरता रहेगा ? परसन्टेज गीरने का यही दौर चालु रहा तो बहुत जल्द ही ५०% से निचे चला जायेगा ।

कितना पिढियां लगेगी, अपने ही देशमें, हिन्दु मेजोरिटी से मायनोरिटी बनने में ? हिदुत्व अगर कमजोर होता है, तो आप देखोगे सरकार पर दबाव बढेगा हिन्दु विरोधी और नई मेजोरिटी के फेवरमें कानूनों का बदलाव करे । जब तक कोइ विषेश और बडा धार्मिक कदम ना उठाये तब तक खास पवित्र स्थलों पर हिन्दुत्व बचा रहेगा, बाद में तो उसे भी मिटाया जायेगा जैसे और देशों में आज कर रहे है ।

समय आ गया है हिन्दु और वैदिक संस्क्रूति, सनातन धर्म के माननेवलों के लिए जागने का । देखो अपने आसपास क्या हो रहा है, अपनी कायरता या विरोध नही करने का रवैया छोडो, बोलो जबतक आजादी है । इस संस्कृति की रक्षा के लिए रक्षणनीति को छोड आक्रमकनीति अपनाओ । कहने का पोइन्ट यह है अगर आप सिरियस नही है तो दूसरे कार्यरत हो जायेंगे और अपना धर्म भारतमें स्थापित कर देन्गे । परिणाम ये होगा की वैदिक संस्कृति की अपनी कोइ जमीन नही बचेगी जो आज भारत नाम की भूमि है उस के पास । जरूरत है हमारे पास जो भी बचा है उस की रक्षा करने की, उसे बनाये रखने की, तभी हम वैदिक शैली से बिना कोइ रुकावट और आजादी के साथ जी पायेंगे । इस लिए हमें एक बनना होगा, नये नये झंडे उठे हैं जाति के नाम पर वो झंडे नीचे करने होंगे । सब के एकसाथ किए प्रयत्न से ही ये काम होगा । और ये शक्य भी है ।

अभी हाल ही में प्रोफेसर सुभाष काकने बताया था की रसिया की १% आबादी अपने आप को हिन्दु होने का दावा करती है । ये इस्कोन के प्रयत्न के कारण हुआ है । बात साबित हो जाती है की अगर हम सब एक हो कर प्रयत्न करें सफलता मिलती है । वैदिक अनुयायी या आंतरराष्ट्रिय वैदिक समुदाय को एक परिवार बनाना है, हमारी संस्कृति और सभ्यता का विकास, सब से पूरानी मानवता सभ्यता, वैदिक सभ्यता का घर भारत ही बना रहे, ये सब करने के लिए ही मैं कहता हुं हमें प्रो-ऍक्टिव बनना है ।

हिदुत्व के बीना भारत का अस्तित्व ही नही है, हिन्दुत्व वो जमीन है जीसमें भारत के मूल लगे हुए हैं । अगर इस मूल को उखाडा गया तो भारत एक पेड की तरह सुख जायेगा । भारत में कई धर्म और जातियां है लेकिन कोइ भी भारत का मूल तक नही पहुंचते । हर कोइ भारतमें जन्मा है मर जायेगा लेकिन भारत तो रहेगा । हिन्दुत्व को नष्ट होने दो तो भारत का क्या होगा ? एक विशाल भूगोलिय खंड , नाश होती भव्यता, उस का साहित्य, उस की कला, उस के स्मारक जो कभी इस खंड पर फैले हुए थे उस की थोडी सी यादें बाकी रह जायेगी । और हिन्दु ही हिन्दुत्व को बनाये नही रख्खेगा तो इसे कौन बचा पायेगा ? अगर भारत की संतानें अपने विश्वास को मजबूती से पकडेगा नही तो कौन इस की रखवाली करेगा ? भारत ही भारत को बचा सकता है और भारत और हिन्दुत्व एक ही है ।

इस द्रष्टिसे, बहुत जरूरी हो जाता है की सनातन धर्म, वैदिक सभ्यता के साथ जीनेवाले हम, हमारे बीच जो भी मतभेद है, कोइ भी विषय में, उसे सुलजाना होगा । हमारे वैदिक कॉज के लिए, एक ताकत बनने के लिए, हम जो भी कर सकें सब का सहकार जरूरी है । वरना दूसरे इस्यु उठेंगे और हमारे वैदिक संस्कृति बचाने के सारे प्रयत्न व्यर्थ हो जायेंगे, हम खूद कलयुग के हर स्टान्डर्ड को प्रस्थापित करने के दोषी बन जायेंगे । कहने का मतलब ये है की हम सब को वैदिक स्टन्डर्ड निभाना है, और दूसरों को भी इस के फायदे बताने हैं, और अगर कोइ इसे मिटाना चाहे तो बचाव करना है ।

हमे ऐसी कोइ लंबी और अंतहीन डिबेटमें उलजना नही है जो हमे कोइ काम ही ना करने दे । हम सब को प्रो-ऍक्टिव बन कर अपनी जीवन शैली और सभ्यता बचानी है ।

तभी हम समृध्ध, डायनेमिक और जिन्दा रीति रीवाज आजादी पूर्वक निभा पायेंगे । ऐसी आजादी बिना चेलेन्ज नही मिलती, और हमे तैयार रहना है एक सोसाईटी बना कर जो हर चेलेन्ज का जवाब दे सके । चलेन्ज करने वाले तैयार बैठे हैं हमे कमजोर देखने के लिए, इस लिए हमे सखत परिश्रम करना है, वैदिक सभ्यता को कमजोर होते रोकना है ।



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Akshay Kumar Ojha के द्वारा
19/03/2013

बहुत ही सुन्दर और आँखे खोलने वाली लेख! साधुवाद भदौरिया जी क्या मैं इस लेख को अपने ब्लॉग पर प्रकाशित कर सकता हु आपके नाम से ?

    bharodiya के द्वारा
    26/03/2013

    नमस्कार अक्षय ऐसी बातें तो फैलाने के लिए ही होती है । अपने ब्लोगमें जरूर ले लो । धन्यवाद प्रतिक्रिया के लिए ।

Sushma Gupta के द्वारा
06/01/2013

भारोदिया जी,आपने अपने इस विस्तृत आलेख में साविस्तार समझाया है कि किसप्रकार से हम अपने देश व् संस्कृति को ॐ अर्थात अपने धर्म को ,एवं वैदिक सभ्यता को जीवित रख सकते हैं वास्तव में आपकी सोच बहुत ही सार्थक है ,धर्म की रक्षा से ही हम अपने सामने खड़ी सामाजिक समस्याओं से निपट सकते हैं..आलेख हेतु वधाई …

03/01/2013

भदोरिया जी नमस्कार एक कटु सत्य से आपने परिचित कराया है , इस लेख से शायद अपने देश की दशा और दिशा को समझ पाये । बहुत - बहुत आभार

    bharodiya के द्वारा
    05/01/2013

    नमस्कार सुधीरभाई आप का आभार प्रतिक्रिया के लिए ।

vasudev tripathi के द्वारा
03/01/2013

मैं स्टेफेन नाप जी को लम्बे समय से जानता हूँ व उनके निर्भीक भाषण का प्रशंसक हूँ! ये जन्म से इसाई हैं अतः स्वभावतः बहुत कुछ जानते हैं, हमें आपको सीखना समझना पढ़ता है| मैंने क्रिस्चियन योगा पर एक लेख लिखा था उसमें इसाई आश्रम आदि का उल्लेख किया था, तब आप पूर्ण सहमत नहीं थे कि इससे कुछ फर्क पड़ने वाला है! किन्तु धर्मान्तरण के लिए कई तरीकों से षड़यंत्र अपनाये जाते हैं…. धर्म की आड़ में बड़ी साजिशें होती हैं.! भाषा अनुवाद के आपके प्रयास के लिए हार्दिक साधुवाद|

    bharodiya के द्वारा
    03/01/2013

    नमस्कार वासुदेवभाई उस समय मैं इस बात की गंभीरता नही जानता था इसलिए मैं आपसे सहमत नही था । लेकिन अब जान गया हुं । योगा तो उन्हें चाहिए लेकिन योगा को खोजनेवाले नही ।


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