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सेक्स के पाठ, सोसियल एन्जिनियरिन्ग – Jagran Junction Forum

Posted On: 23 Feb, 2013 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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मेरे महान भारत के लोग क्या इतने आगे बढ गये हैं की कुदरत ने दी हुई, प्राणीसहज भय को भांपने की ताकात ही गंवा दी है ? अपने आप को महा मानव बना लिया की प्राणी की तरह कान खडे नही हो जाते भय का आगमन या आक्रमण होते समय भी । क्या हम इतने मुर्ख हो गये हैं की समज नही सकते सरकार बिन मांगे जो देती है उसे परख लेना चाहिए ? सब कुछ छीन लेने वाली सरकार बिना मांगे दे दे तो अचरज नही होता ?

खैर, सरकार का दोष भी नही वो तो मजबूर है । पहले ईस लेख को पढ लें “सेक्स से खिलवाड़ – Jagran Junction Forum” फिर असली बात ।

demon_with_child

( इस शैतान के बारेमें बादमें लिन्क दी जायेगी, अभी समज लो ये शैतान है और सारी दुनिया पर राज करना चाहता है धन के बल से )

आज भारत में ही नही सारे विश्व में बच्चा तो क्या आदमी बुढे होने तक एक शैतान की गोदमें बैठ कर ही पढाई करता है । शैतान ही उसका गुरु है । इन गुरुओं में स्कुल-कोलेज, मिडिया, मनोरंजन, सहित्य और सोस्यल साईट्स भी शामिल है । ईन सबके द्वारा हजारों विषय पर पढाया जाता है, सिखाने के मकसद से नही, समाज जीवन के फायदे को देख कर नही बल्की एक सोस्यल एन्जिनियरिन्ग की तरह, जीस से समाज जीवन बदला जा सके । बदलने का मतलब समाज की उन्नत्ति नही पर अधोगति है ।

इस शैतान के कपाल पे ६६६ का आंकडा है वो कैदखाने का ताला है । इसाईयों को तो मालुम है दुसरों को बता देता हुं । ये कैदखाने का ताला है जहां गोडने उसे कैद किया है । ईस ताले की चावी दुनिया के धर्मों के विनाश में है, आदमी के चारित्र के पतन में है, गुलामों की घोर मेहनत के पसीने में हैं । सेकस एज्युकेशन चावी बनाने के औजारों मे से एक है ।

सेक्स के पाठ की जरूरत आदमी को क्यों पडी ? २०००० हजार साल की मानव सभ्यता में आज ही क्यों ? एक मुर्खामी भरा जवाब मिला “ एइड्ज इत्यादी यौन रोगों के प्रति बच्चों को जागरुक करना जरूरी है ” । ऐसी शिक्षा तो बच्चे के बाप को देनी चाहिए बच्चों को क्यों ? कीसी के पास जबाब नही ।

भारत में इस पढाई को लाने के पिछे भारत में बलात्कार को कारण बताया गया । क्या बुढे बलात्कार नही करते ? उसने पूरी जिन्दगी सिखा ही नही सेक्स क्या होता है ? बुढों को भी सिखाओगे नाईट स्कूलमें ?

ये शैतान जहां सफल हो गया ऐसे देश अमरिका के लोगों की कुछ बात रखता हुं ।

अमरिकामें सेक्स एज्युकेशन के बाद सामाजिक ढांचे में बडा अंतर आ गया है । बच्चे स्कूल की उमर में ही सेक्स में रत हो गये हैं, यहां तक की स्कूल बॅग मे निरोध के पेकेट रखने लगे हैं ।

शादी की उमर होते होते सेक्स को लेकर जो भी अनुभव हुए उस के कारण शादी का जो सबसे बडा आकर्षण सेक्स होता है वो खतम हो गया है । लोग शादी करना टालने लगे हैं । सामाजिक सुरक्षा के कारण शादी करते हैं लेकिन देरसे करते हैं । पति पत्नि के बीच की वफादारी पूरानी बात हो गई है । कुटुंब प्रथा तुट गई है । कब पत्नी छोड के भाग जाये या कब पति पत्नि को छोड दे कोइ गेरंटी नही । १९६० में अमरिकन एडल्ट ७२% शादीशुदा होते थे आज ५१% रह गये हैं । बाकी के ४९% बिना शादी के, तलाक शुदा और विधवा-विधुर । जन्म-दर का लेवल भी इतिहास में सब से नीचे । हरेक १००० के पिछे २३ का आंकडा था, आज १३.८ पर आ गया ।

ये उद्गार है एक राष्ट्रवादी अमरिकीका “Obviously something is fundamentally wrong. Our society has been subverted by a satanic cult, the Illuminati ( i.e. Freemasonry.) Our government, corporations and media are owned or controlled by the Illuminati central banking cartel. The institutions of marriage and family are being undermined in order to destabilize society, making it vulnerable to the Illuminati Communist NWO. The destruction of marriage and family has been a plank in the Communist Manifesto since 1848.”

अर्थात

“ये तो स्पष्ट है, मूल में ही कुछ गलत है । हमारे समाज को सैतानिक संप्रदाय, इल्ल्युमिनिटी, हमारी सरकार, इल्ल्युमिटी के कंट्रोल में रही केद्रिय बेन्कों की कार्टेल की मालिकी या उस के कंट्रोल में रही कंपनिया और मिडिया द्वारा बरबाद किया जा रहा है । इल्लुमिनिटी की साम्यवादी “न्यु वर्ल्ड ओर्डेर” की आसान शिकार बनाने के लिए हमारी सोसाईटी को अस्थिर बनाने के लिए शादी और कुटुम्ब प्रथा की घोर खोदी जा रही है । शादी और घर तोडने का साम्यवादी मेनिफेस्टो १८४८ से चला आ रहा है ।“

भारत में इस शैतान के गुलाम या उपासक कौन है बताने की जरूरत नही । ये शैतान ऐसा क्यों चाहता है मेरे अन्य लेखों से पता चल जायेगा ।

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

akraktale के द्वारा
25/02/2013

भरोडिया जी सादर, सत्य को समाज के सामने लाने का सुन्दर प्रयास.

    bharodiya के द्वारा
    06/03/2013

    अशोकभाई नमस्कार धन्यवाद प्रतिक्रिया के लिए ।

shashi bhushan के द्वारा
23/02/2013

आदरणीय भरोदिया जी, सादर ! आपकी अगली रचना का इन्तेजार है !

    bharodiya के द्वारा
    24/02/2013

    नमस्कार डो.साहब जरूर धन्यवाद आपका ।


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