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बादल फाडा किसने ?

Posted On: 26 Jun, 2013 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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उत्तराखंड की त्रासदी के बारेमें बहुत कुछ लिखा गया है । बादल फटने के कारण स्कूली मास्टरों की तरह समजा दिया गया हैं । —-((( संघनित बादलों का नमी बढ़ने पर बूदों की शक्ल में बरसना बारिश कहलाता है। पर अगर किसी क्षेत्र विशेष में भारी बारिश की संभावनाओं वाला बादल एकाएक बरस जाता है, तो उसे बादल का फटना कहते हैं। इसमें थोड़े समय में ही असामान्य बारिश होती है। हमारे यहां बादल फटने की घटनाएं तब होती हैं, जब बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से मानसूनी बादल हिमालय की ऊंचाइयों तक पहुंचते हैं और तेज तूफान से बने दबाव के कारण एक स्थान पर ही पानी गिरा देते हैं। बरसने से पहले बादल पानी से भरी एक ठोस वस्तु का आकार लिए होता है, जो आंधी की चपेट में आकर फट जाता है। )))— स्कूली मास्टर उस जमाने की बात लिख गये जब मौसम पर कुदरत का अधिकार था, आज मौसम पर आदमी ने अधिकार पा लिया है बहुत कम लोग जानते हैं या जानते हुए भी विश्वास नही करते ।

पिछले १०० साल की ये बादल फटने की घटनाएं है ।
Duration Rainfall Location Date
40 minutes 9.25 inches (234.95 mm) Guinea, Virginia, USA 24/08/1906
5.5 minutes 2.43 inches (61.72 mm) Port Bells, Panama 29/11/1911
15 minutes 7.8 inches (198.12 mm) Plumb Point, Jamaica 12/05/1916
20 minutes 8.1 inches (205.74 mm) Curtea-de-Arges, Romania 07/07/1947
20 hours 91.69 inches (2,329 mm) Ganges Delta, India 08/01/1966
13 hours 45.03 inches (1,144 mm) Foc-Foc, La Réunion 08/01/1966
1 minute 1.5 inches (38.10 mm) Alaknanda river in Uttarakhand 26/11/1970
—— —– 1500 killed Chirgaon in Shimla district, Himachal Pradesh 15/08/1997
—–       killed 250- dancer Protima Bedi. Kali valley of the Kumaon division, ——-Uttarakhand 17/08/1998
—— 400 people died gowalpara Aug.-1998
—— 40 persons were killed Kullu, Himachal Pradesh 16/07/2003
—– 17 people were killed Badrinath shrine, Uttarakhand 06/07/2004
10 hours 57.00 inches (1,448 mm)5000 dead. Mumbai, India 26/07/2005
—-52 dead Bhavi village in Ghanvi, Himachal Pradesh 16/08/2007
—– 15,000 people were killed Deccan Plateau region of Andhra Pradesh 28/09/1908
—– 38 people were killed Pithoragarh district of Uttarakhand 07/08/2009
1 hour 9.84 inches (250 mm)1000 dead Leh, Ladakh, India 05/08/2010
—– two villages -entire village dead Almora in Uttrakhand 15/09/2010
1 hour 5.67 inches (144 mm)National Defence Academy, Pune, India 29/09/2010
1.5 hours 7.15 inches (182 mm)4 dead Pashan, Pune, India 04/10/2010
——- 4 persons dead near Jammu 09/06/2011
—– 2 dead and 22 missing Manali town in Himachal Pradesh 20/07/2011
——- Palam, Delhi 15/09/2011
—– 39 people died Rudraprayag 14/09/2012
—- fianal data not avalable Kedarnath, Uttarakhand 17/06/2013

इस डेटा में हम देख सकते हैं की १९७० तक भारत में कहीं बादल नही फटे थे या फिर डेटा अधुरा है । १९६६ में भारत लिखा है पर गंगा का डेल्टा याने अंत तो बंगलादेश में है । शुरुआत उत्तराखंड से ही हुई । २०१३ तक ७ बार उत्तराखंड में बादल फटे । ४ बार हिमांचल प्रदेश, ३ बार महाराष्ट्र, बाकी जगह एक एक बार । ताज्जुब की बात है इसमें चेरापूंजी नही है, सबसे ज्यादा बारिश वही पर होती थी ऐसा मास्टरजी बताते थे ।

इन बातों को नोट करो ।

उत्तराखंड में सबसे ज्यादा क्यों की वो देवभूमि है ।

महाराष्ट्र में दो सेन्सेटिव एरिया थे, एक मुंबई शहर, देश की आर्थिक राजधानी और दो नेशनल डिफेन्स की संस्था ।

पालम हवाई अड्डा, देश की राजकिय व्यवस्था की रिड की हड्डी ।

पहली दो घटना के बीच २७ साल का गॅप है । फिर घटनाएं आम हो जाती है । एक एक और दो दो साल में एक घटना बनती रही और २०१०-११ आते आते तो ४ और ३ धटना बन गई एक साल में । ये दौर तो बहुत टेंशन का रहा । बाबा रामदेव, अन्ना, लोकपाल ! जनता के साथ क्या बादल भी टेन्शन में थे ?

नही बादल टेन्शन में नही थे बादल बरसाने वाला राक्षस देश अमरिका टेन्शन में था । सिधा आरोप ? हां, कारण भी है ।

राक्षसी प्रजा यहुदियों के “न्यु वर्ल्ड ओर्डेर” के एजन्डे से अब भारत की जनता अन्जान नही है । उन्हें जगत की आबादी से सख्त नफरत है. खास कर धार्मिक जनता से । दुनिया पर राज करना है तो कोइ देश राजकिय, आर्थिक या सैनिक द्रष्टिसे मजबूत ना हो जाये उस बात का भी ख्याल रखना है ।

१९७४ में हेनरी किसिन्जर ने एक थियरी बनाई की खूरक की सप्लाय द्वारा तिसरी दुनिया की आबादी का विनाश करे जीस से धरती के संशाधन का उयोग करने वाले कम हो और धनी देश की धनी प्रजा के लिए वो संशाधन बच जाये । १० डिसेमबर १९७४ को यु.एस. नेशनल सिक्युरीटी काउंसिल ने दुनिया की आबादी की स्टडी करवाई और एक क्लासिफाईड डोक्युमेंट बनाया । NSSM 200 याने नेशनल सिक्युरिटी स्टडी मेमोरेन्डम २०० । और बाद में कहा गया की दुनिया की बढती आबादी से अमरिका की सिक्युरिटी को खतरा है । कितना जुठ, कितनी नाजुक सिक्युरीटी ? अपनी प्रजा से जुठ बोल बोल कर सिक्युरिटी के बहाने खरबो डोलर का खर्च कर के राक्षस जैसी ताकत पा ली फिर भी सिक्युरिटी नाजुक ? आज भी सिक्युरिटी के बहाने डोलर उडा रहा है, डिफेन्स बजट के नाम से । ५० देश पर ऍटेक करने के बाद भी बदमाश “डिफेन्स बजेट” बोलता है । हकिकत में वो “ऍटॅक बजेट” है ।

ये रहा वो डोक्युमेन्ट ।

h t t p:/ /p d f.usaid.gov/ pdf_docs/PCAAB500.pdf

उस राक्षस देश ने क्या ताकत पा ली है, कबसे प्लानिंग था उस का डोक्युमेंट नीचे की फाइल में है । ७ अमरिकी सैनिक ओफिसरने मिलकर ये बूक लिखा था । टाईटल है “Weather as a Force Multiplier:Owning the Weather in 2025”

h t t p: / /c s a t.au.af.mil/ 2025/volume3/vol3ch15.pdf

अभी ये खूलना बंद हो गया है, पेज नंबर तीन कोपी कर के दिया है कम से कम उस के विषय क्या थे समजमें आयेन्गे ।

Chapter Page
Disclaimer……………. …………………….. …………………….. …………………….. …………………….. ………………ii
Illustrations…………. …………………….. ……………………..……………………..……………………..……………….iv
Tables………………..……………………..……………………..……………………..……………………..………………..iv
Acknowledgments………..……………………..……………………..……………………..……………………..…………v
Executive Summary ……………………..……………………..……………………..……………………..……………….vi
1 Introduction…………..……………………..……………………..……………………..……………………..……………….1
2 Required Capability…………….……………………..……………………..……………………..……………………..….3
Why Would We Want to Mess with the Weather? ……………………..……………………..………………..3
What Do We Mean by “Weather-modification”?………………………..……………………..……………….4
3 System Description ……………………..……………………..……………………..……………………..…………………8
The Global Weather Network……………….……………………..……………………..……………………..……8
Applying Weather-modification to Military Operations ……………………..……………………..………10
4 Concept of Operations ……………………..……………………..……………………..……………………..…………..13
Precipitation ……………………..……………………..……………………..……………………..…………………..13
Fog…………………..……………………..……………………..……………………..……………………..……………16
Storms………………..……………………..……………………..……………………..……………………..………….18
Exploitation of “NearSpace” for Space Control……………….……………………..……………………....20
Opportunities Afforded by Space Weather-modification…………………………..……………………....20
Communications Dominance via Ionospheric Modification…………..……………………..…………….21
Artificial Weather……………….……………………..……………………..……………………..………………….27
Concept of Operations Summary……………….……………………..……………………..……………………..28
5 Investigation Recommendations………..……………………..……………………..……………………..……………31
How Do We Get There From Here?………………………………………..……………………..………………31
Conclusions ……………………..……………………..……………………..……………………..……………………34
Appendix Page
A Why Is the Ionosphere Important? ……………………..……………………..……………………..…………………..36
B Research to Better Understand and Predict Ionospheric Effects……………….……………………..………..39
C Acronyms and Definitions ……………………..……………………..……………………..……………………..………41
Bibliography…………..……………………..……………………..……………………..…………………..

NewPictu)

ये फोटो अमरिका के सैनिक अभियान हार्प का है । हर्प खास फ्रिक्बन्सी द्वारा धरती के आयोनोस्फियर पर्त, धरती के मेग्नेटिक वेव्ज और उन के केमट्रेल प्रोजेक्ट से विमानो या रोकेट द्वार हवा की उपरी सतह या बादलों में केमिकल का छीटकाव करते हुए मौसम को बदल देता है, हवा का रूख बदल देता है । दूसरे देशों के रडार और पूरा कोम्युनेकेशन सिस्टम खराब कर देता है । किसी देशमें बारिश रूकवा देना , बरसाना, या बादल को फाडना ने का काम भी करता है । उस की दूसरी शक्तियां धरती कंप, सुनामी, बवंडर, कोइ प्रदेश के उपर के आयनोस्फियर की पर्त में छेद कर सीधे सुर्य को खूला कर के असह्य गरमी बरसाना या ठंडे प्रदेशों से ठंडी हवा बहा कर असह्य ठंडी लाना ।

इस सिस्टम के ऍन्टिना के पूरे खेत होते हैं । और उस के हर मित्र देश या गुलाम देश में एन्टेना लगाये है जीस से पूरी दुनिया कवर हो सके । भारत में भी लगे हो कौन बतायेगा ।

उत्तराखन्ड हादसा कैसे हुआ अंदाजा ही लगा सकते हैं, ऐसी बातों का सबूत हम नही जुटा पाते । हार्प नें अपनी सिस्टम से बादलों को इकट्ठा किया, चायना की बोर्डर से केमिकल द्वरा बारिश का ट्रीगर दिया गया । और एक बात नेपालियों के आतंक की उठी है तो ये चायनीज भी हो सकते हैं या नेपाली माओवादी हो सकते हैं ।

सरकार द्वारा बचाव कार्य में विलंब और तरह तरह के नाटक, नाजुक समय मे देश विदेश की आवन जावन भी शक पैदा करती है की सरकार को पहले से ही पता था वो सहभागी थी और उसका रोल था निष्किय नब जाना, हर तरह से ।

मानवता दुश्मनो, साक्षसों को फायदा क्या हुआ । राक्षस को तो आदमी मरे उस से खूशी होती है, थोडी खूशी मिली । धर्म के दुश्मनो को धार्मिक स्थल बह गया इस से खूशी हुई, हिन्दु के चार धाम से एक धाम बरबाद हो गया । मिडियाने जनता को पहाडों और यात्राओं से डरा दिया, जनता के ही मुह से कबूल करवा दिया की “अब हम ऐसी यात्रा नहीं करेंगे” ।

भारत में ही नही दुनिया भरमें ये काले कारनामें करते हैं । खूद अपने देश में भी करवाता है तो दूसरे देशों को कैसे छोडेगा । २०१० का पाकिस्तान का पूर भी उस का ही कारनामा था ये पाकिस्तानी विडियो यही बात बताता है । अफधानिस्थान और पाकिस्तान में इतिहास में उतना बारिश कभी नही पडा था जीतना उस पूर के समय पडा था ।

reality of floods in pakistan (HAARP urdu 1 of 2)

http://www.youtube.com/watch?v=h38R-tOZ_pg

reality of floods in pakistan (HAARP urdu 2 of 2)

http://www.youtube.com/watch?v=glMWbNtyh_Y

HAARP– What is HAARP IS HAARP Dangerous HAARP and Weather Control

http://www.youtube.com/watch?feature=endscreen&v=xo-T_KvLNdQ&NR=1

globalist genocide in india exposed

http://www.youtube.com/watch?v=UWHcqhn–OY

Chemtrails The facts

http://www.youtube.com/watch?v=G9cQfcKR0EM

Haiti EarthQuake H.A.A.R.P 2010

http://www.youtube.com/watch?v=ZxS3I1Vpxzg




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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chaatak के द्वारा
07/07/2013

स्नेही भरोदिया जी, आपके द्वारा प्रस्तुत आंकड़े बताते हैं कि आपकी शंका निर्मूल नहीं है सरकार को वक्त रहते चेतना चाहिए वर्ना वीराने का फायदा उठा कर चीन जैसे देश उत्तराखंड को हिन्दुस्तान में घुसने की सुरंग बनाने में देर नहीं करेंगे| हार्दिक बधाई !

    bharodiya के द्वारा
    07/07/2013

    चातकभाई आपने बाद के समाचार पढे होंगे । एक नियम बनाया है की उत्तराखंड की नदियों के किनारे आबादी को बसने नही दिया जायेगा । नदी किनारे तो भारत की सभ्यता का उदय हुआ था । पर्वत शिखर पर तो गांव बसते नही । तलहटी में ही गांव बसते हैं । और तलहटी में तो छोटी बडी नदी होती ही है । पर्वत का पानी नीचे ही तो आत है । मतलब साफ है, जगह खाली करवानी है । सिधा चायना के हवाले ।

manoranjanthakur के द्वारा
03/07/2013

विचारनिए रचना …सर्गार्वित ..बधाई

    bharodiya के द्वारा
    06/07/2013

    धन्यवाद आप का, मनोरन्जनभाई

bhagwanbabu के द्वारा
01/07/2013

जानकारियों की लम्बी लिस्ट दी है आपने…. इसका शुक्रिया… . कुछ भी हो … इंसानो के द्वारा किए गए छेड़छाड़ की वजह से ही ऐसी आपदाएँ आती है और आती रहेंगी…

    bharodiya के द्वारा
    02/07/2013

    नमस्कार भगवानबाबु और आप का स्वागत है । हां, कुदरत से लडना अब भारी पड रहा है । आदमी कुदरत से लडकर ही खूद जंगली में से सिविल प्राणी बना ( सिर्फ दावा, आदमी अभी तक प्राणी ही है ), वो सकारात्मत कदम था । कुदरत ने बदला नही लिया । लेकिन अब अति हो गई है सिविलाजेशन के जुठे नाटक से, कुदरतनें फिर दानव जैसे राक्षस पैदा किये हैं जो सोसाईटी को तबाह करेगा । धन्यवाद आप का ।

01/07/2013

आदरणीय भरोदिया जी अभिवादन  बहुत अच्छी जानकारी आपने दी है , ऐसी आशंका आज से दस वर्ष पूर्व की जा रही थी । आज आपके प्रामाणिक तथ्यों से इसे बल मिल रहा है । धन्यवाद

    bharodiya के द्वारा
    02/07/2013

    नमस्कार सुधीरकुमार भाई आज नेट आनेके बाद अच्छे अच्छों की पोल खूल रही है । हालांकी भ्रम भी बहुत फैलाया जा रहा है लेकिन उनमें से सही क्या है इतना समजने की काबिलियत भी भारत की जनता के पास आती जा रही है । अंग्रेजी में तो खजाना भरा पडा है जो अमरिकन और युरोपियन राष्ट्रवादी जनता ने लिखा है । हिन्दी में राजीव दिक्षित ने शुरुआत की थी और मेरे जैसे कई लोग अब आगे बढाते जा रहे हैं । आज इतिहासकारों को जुठा साबित कर दिया है, बडे बडे बडे पूजनिय नेताओं, विज्ञानिकों को राक्षस साबित कर दिया है उन के अभी तक छूपे कर्मों को लेकर । धन्यवाद आप का ।

jlsingh के द्वारा
27/06/2013

आदरणीय भरोदिया जी, सादर अभिवादन! अगर आपके द्वारा प्रस्तुत जानकारी सही है तो इस पर सबको विशेषकर हमारे आकाओं को ध्यान देनी ही चाहिए और इसका काट भी ढूंढ निकालना चाहिए! नही तो हमारी सेना राहत कार्य में ही लगी रहेगी और उधर से आक्रमण न हो जाय! आपके आलेख में प्रस्तुत डेटा इसकी प्रमाणिकता को बढाता है ..कहाँ हैं हमारे वैज्ञानिक और नीति निर्धारक!

    bharodiya के द्वारा
    28/06/2013

    नमस्कार जवाहरभाई मेरा काम तो बताना है की देखोभाई, दुनियामें ऐसा कुछ चलता है । बाकी पूरा भारत पडा है, बहुत से सक्षम लोग है, बहुत से निष्णात है । आगे वोही देख सकते हैं हकिकत क्या है, कोइ समस्या है तो उपाय क्या है । हम और आप जैसे आम आदमी इतना सा काम करदे वही काफी है ।

Rajesh Dubey के द्वारा
27/06/2013

बदल फटने की सुन्दर जानकारी के लिए धन्यवाद.

    bharodiya के द्वारा
    28/06/2013

    नमस्कार और आप का धन्यवाद, राजेशभाई ।


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