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एक के पाप का दोष अन्य पर डाल देना बन गया है नया ट्रेंड

Posted On: 19 Sep, 2017 social issues में

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एक स्कूल में हुई बालक की हत्या का मामला चल ही रहा है, इस बीच दो स्कूलों की बात पढ़ी। आज तीसरे का समाचार पढ़ा तो ये लिख दिया। १६/९/२०१७ को अहमदाबाद के शाहपुर की नगर पालिका सरस्वती स्कूल में ३० साल के सुनिल डामोर नाम के शिक्षक ने ७ साल की बच्ची का रेप कर दिया। बाद में बच्ची के चुप रहने के लिए उसके बाल पकड़कर ऐसे झकझोरा कि बच्ची ऐसी चुप हो गयी, मानो गूंगी हो गयी।


rape


बेचैन रहती बच्ची को उसकी तबीयत खराब है, ऐसा समझकर मां-बाप अस्पताल ले गए, तभी पता चला कि उसका रेप हुआ है। शाहपुर पुलिस आरोपी शिक्षक को पकड़कर आगे की कार्रवाई के लिए स्कूल ले गयी, जनता पहले से ही स्कूल पर पथराव कर रही थी।


एक नया ट्रेन्ड शुरू हो गया है, एक के पाप का दोष अन्य पर डाल देना। स्कूल के पास कोई मीटर नही होता कि वो नाप सके कि उसके स्टाफ में कितने % लोग राक्षस हो सकते हैं और कौन सा आदमी राक्षस है। आज कल तो राक्षस मीठा-मीठा बोलकर सूट-बूट में घूमते हो तो पहचाने कैसे? राक्षस अच्छे आदमी होने का अभिनय करते घूमते हों, तो विलन कौन है कैसे पता चलेगा?


स्कूल से अपहरण हुआ हो, खून हुआ हो, तो मान सकते हैं कि एक आरोपी का अन्य साथी स्कूल में हो सकता है, पैसे का मामला-सुपारी या फिरौती, लेकिन ७ साल की बच्ची के रेप में अन्य साथी नही हो सकता। स्कूल प्रशासन तो बिलकुल नहीं।


बैंक लूटते समय लुटेरा कैशियर को मार दे या ग्राहक को मार दे, तो क्या बैंक जिम्मेदार है? बिलकुल नहीं। हां, कभी स्टाफ का कोई आदमी लुटेरों का साथी हो सकता है, तो वो पकड़ा जाता है, लेकिन बैंक पर आरोप लगाकर उसकी बदनामी नहीं करते हैं। नेता की सभा में बम फटता है या अन्य मारामारी हो जाती है, तो क्या नेता या सभा आयोजक दोषी है?


२००६ में मुम्बई की लोकल ट्रेनों में बम धमाके हुए, तो क्‍या किसी ने रेलवे को दोष दिया। ताज होटल में कसाब घुस गया था, तो क्या ताज के दरबान दोषी थे? अभी नवरात्रि आ रही है। पहले देर रात तक कार्यक्रम चलते थे। बदमाशी कोई ना करे, इसलिए सरकार ने देरी करने पर पाबंदी लगा दी है। फिर भी कुछ हो जाता है, तो कौन दोषी है?


सरकार ही दोषी है। वड़ोदरा और मुंबई के मेरे शुरुआती दिनों में रात के ५ बजे तक नवरात्रिखेली है। जनता की रक्षक होती थी नवरात्रि में पूजी जाती माता अंबाजी और माता बहुचराजी। धीरे-धीरे लोगों को धरम से भटकाकर माताओं को लोगों से दूर कर दिया और राक्षक के रूप में पुलिस को आगे किया। अब आगे पुलिस को हटाकर टेक्नोलॉजी को आगे किया जाएगा। कहेंगे कि नवरात्री में सीसीटीवी लगाओ। कुछ ऊंच-नीच होगा तो आयोजकों को ही घेरा जाएगा।


स्कूलों का दोष इतना है कि वो मैकाले को पढ़ाकर भारत के लोगों का धर्मभ्रष्ट कर रहे हैं। इसमें पूरा दोष स्कूल का भी नहीं, सरकार ही क्या पढ़ाना है, वो बताती है और अभ्यासक्रम बनाकर दे देती है ।

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